

आत्मज्ञान पब्लिकेशन एण्ड फाउडेशन (रजि.), जयपुर
द्वारा प्रकाशित पुस्तकों का भव्य विमोचन रैगर वंश के युग पुरुष संत
रैगर वंश का बृहद इतिहास
- रैगर वंश का बृहद इतिहास
-
लेखक, छिगनलाल गुसाईंवाल
संवाटक रामनिवास रैगर - आत्मज्ञान पब्लिकेशन एण्ड फाउण्डेशन, जरापुर
Books
गुरु महिमा सुधा
- डॉ. गोपाल 'जिगर
रैगर समुदाय के वास्तविक गोत्र
- छिगनलाल गुसाईवाल
- आत्मज्ञान पब्लिकेशन एण्ड फाउण्डेशन
रैगर वंश : एक सिंहावलोकन
- डॉ. गोपाल 'जिगर
रैगर वंश का बृहद इतिहास
- लेखक. छिगनलाल गुसाईवाल
- संपादक रामनिवास रैगर
- आत्मज्ञान पब्लिकेशन एण्ड फाउण्डेशन
अक्कल बड़ी कि बहस
- डॉ. हजारी लालमौर्य
सेढ़ूराम मौर्य
- व्यथित बैल
लेखक
छिगनलाल गुंसाईवाल
- 1 - छिगनलाल गुसाईवाल का जन्म 7 अक्टूबर, सन् 1952 को ग्राम बिचून जिला-जयपुर राजस्थान में एक साधारण परिवार में हुआ।
- 2 - माताजी श्रीमती नाथीदेवी का रवर्गवास इनके बचपन में हो गया था। बावड़ी निवासी, नाना श्री भूरारामजी बांसीवाल ने बड़े दुलार के साथ लालन-पालन किया।
- 3 - लगभग 07 वर्ष की अवस्था में पिताजी श्री केशरलालजी के पास आ गये और इनको प्राथमिक पाठशाला में प्रवेश दिला दिया गया।
- 4 - इन्होंने ग्राम बिचून से प्रथम श्रेणी से माध्यमिक परीक्षा एवं उच्चत्तर माध्यमिक परीक्षा पास की। महाराजा कॉलेज जयपुर से गणित विषय में बी.एससी.(ऑनर्स) एवं राजस्थान विश्वविद्यालय जयपुर से एम.एससी.(गणित) और बाद में विधि स्नातक की उपाधियां प्राप्त की।
- 5 - आरम्भ से मेधावी छात्र रहे थे। उच्च कक्षा के सवालों को हल करके प्रशसा पायी। महाराजा कालेज में मेरीटोरियस क्लब के सक्रिय सदस्य थे।
- 6 - इन पर इनके धर्म-भाई श्री ओमप्रकाशजी शर्मा के पिताश्री परशुरामजी सुरोलिया का वरदहरत था। उनकी प्रेरणा से इन्होंने उच्च शिक्षा ग्रहण की।
- 6 - महाविद्यालय स्तर पर गोल्ड मेडिलिस्ट, विश्वविद्यालय स्तर पर सिलवर मेडिलिस्ट थे। सर्वप्रथम उद्योग विभाग, राजस्थान के अधीन सुजानगढ़, जिला चुरू में लवण निरीक्षण के पद पर कार्य किया
- 7 - वर्ष 1978 मे राजस्थान तहसीलदार सेवा में चयन हुआ और वर्ष 1993 में राजस्थान प्रशासनिक सेवा में पदोन्नति हो गयी।
- 8 - चुनाव एवं कानून-व्यवस्था के क्षेत्र में कार्य कुशलता को देखकर, श्रीगंगानगर, अलवर, झुन्झुनू, भरतपुर, धौलपुर आदि जैसे संवेदनशील जिलों में पदस्थापित किया गया। ये बिना किसी दबाव के राजकीय सेवायें देने को प्राथमिकता देते थे। अपने कर्मचारियों के साथ पारिवारिक व्यवहार किया करते थे।
- 9 - इन्होंने किसी कर्मचारी का अहित नहीं किया। प्रेम से अकर्मण्य को कर्मण्य बनाया। आप स्वमहामण्डन एवं दलगत राजनीति से दूर रहकर, अपने जन्मदाता रैगर समाज की सेवा करना पसंद करते है तथा बिना किसी राजनीति के अपने समाज की विभिन्न संस्थाओं से जुडे हुए है।
संपादक का संदेश
राम निवास रैगर
- 1 - रामनिवास रैगर का जन्म 04.11.1961 को एक साधारण परिवार में ग्राम-मुण्डावरा, तहसील-थानागाजी, जिला-अलवर, राजस्थान में हुआ।
- 2 - आपकी माता चन्दो देवी तथा पिता श्री सोहनलाल सांटोलिया थे। जब आप 11वीं कक्षा के विद्यार्थी थे, तब आपके पिताश्री सोहनलाल सांटोलिया जी का स्वर्गवास हो गया और आपके परिवार पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा।
- 3 - उनकी अंतिम सीख थी कि-“तुम्हें जीवन की इस नदिया से पार उतरना है।” आपने हर मुसीबत का हिम्मत से सामना किया। उस समय आपकी माता जी ढाल बनकर, सामने आयी उनके मार्गदर्शन और सीख पर चलकर, कामयाब हुए।
- 4 - आपने प्रारम्भिक शिक्षा ग्राम मुण्डावरा, माध्यमिक शिक्षा ग्राम नारायणपुर से तथा उच्च माध्यमिक और कॉलेज शिक्षा अलवर से प्राप्त की। कॉलेज शिक्षा के दौरान 21 सितम्बर, 1982 को आपकी दिल्ली में युनाईटेड बैंक आफ इण्डिया में नियुक्ति हो गयी।
- 5 - लगभग 40 वर्ष की सेवा के दौरान आपको देश के धर्मपत्नी श्रीमती बीना देवी एवं श्री रामनिवास सांटोलिया (रैगर) विभिन्न भागो में कार्य करने का अवसर प्राप्त हुआ।
- 6 - आपने अपनी सेवाएं दिल्ली, असम, पश्चिम बंगाल, छतीसगढ़, उड़ीसा, मध्य प्रदेश, चन्ड़ीगढ़, हरियाणा, पंजाब, जम्मू हिमाचल प्रदेश एवं राजस्थान राज्य में दी।
- 7 - आपको सेवाकाल के दौरान देश के विभिन्न प्रदेशों में वहाँ के रहन-सहन संस्कृति, भाषा, आचार-विचार, खान-पान एवं बहुत-सी बातों को नजदीक से देखने, समझने एवं सीखने तथा उनको जीवन में अपनाने का अवसर मिला।
- 8 - आप नवम्बर, 2021 में पंजाब नेशनल बैंक, जयपुर से मुख्य प्रबंधक के पद से सम्मानपूर्वक सेवानिवृत्त हुए। आप अपने विद्यार्थी जीवन से ही सामाजिक रूप से जागरूक रहे हैं।
Author (लेखक)
आत्मज्ञान पब्लिकेशन एण्ड फाउंडेशन के उद्देश्य और कार्य-
- 1. समाज के कला, साहित्य, संस्कृति, इतिहास एवं अध्यात्म के कार्य का संवर्द्धन, संरक्षण, प्रकाशन कर समाज तक पहुचाना।
- 2. समाज में कला, साहित्य, संस्कृति एवं अध्यात्म को बढावा देने हेतु सेमीनार, विचार-गोष्ठी, कार्यशाला के कार्यक्रम का समय-समय पर आयोजन करना।
- 3. कला, साहित्य, संस्कृति, इतिहास एवं अध्यात्म क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले कलाकार, रचनाकार, लेखक, कवि, विचारक, समाज-सुधारक, आध्यात्मिक विभूतियों को प्रोत्साहित एवं सम्मानित करना
- 4. कला, साहित्य, संस्कृति, इतिहास एवं अध्यात्म के प्रति समाज के लोगो में जागरूकता पैदा कर छुपी हुई प्रतिभाओं को प्रोत्साहन एवं लेखन कार्य के प्रति जाग्रत करना।
- 4. कला, साहित्य, संस्कृति, इतिहास एवं अध्यात्म के प्रति समाज के लोगो में जागरूकता पैदा कर छुपी हुई प्रतिभाओं को प्रोत्साहन एवं लेखन कार्य के प्रति जाग्रत करना।
- 5. पुस्तकों को संग्रहित कर, आत्मज्ञान पुस्तकालय स्थापित करना।
- 6. समाज के साहित्यकार, कवि, लेखक, रचनाकार, विचारक तथा अध्यात्म के ज्ञान की पुस्तकों को समाज तक पहुँचाना।
- 7. समाज के साहित्य की पुस्तकों को विद्यालय, कॉलेज और उच्चतर शिक्षा-संस्थानों के पुस्तकालय में उपलब्ध कराना।
- 8. सभी नागरिकों को जल. पर्यावरण, वन, जीवों के संरक्षण के बारे में जागरूकता पैदा करना।
- 9. उपरोक्त वर्णित कार्य बिना किसी लाभ अर्जित करने की भावना से किये जायेगें।
Vision
आत्मज्ञान पब्लिकेशन एण्ड फाउंडेशन के उद्देश्य और कार्य में सहयोग देने वाले महानुभाव/सदस्य-
- 01. अखिल भारतीय रामजन मण्डल, जयपुर
- 02. रैगर कला, साहित्य एवं संस्कृति परिषद
- 03. श्री टी. आर. वर्मा, जयपुर
- 04. श्री बी. एल. नवल, जयपुर
- 05. श्री प्रदीप मोहन चांदोलिया, दिल्ली
- 06. श्री दयानंद कुलदीप, सीकर
- 07. कर्नल श्री दुर्गालाल, केकड़ी
- 08. श्री दिलीप मांदोरिया, नीमच
- 09. श्री खैरातीमल सांटोलिया, अलवर
- 10. श्री राजेन्द्रकुमार खोलिया, मादीपुर
- 11. श्री महेश कानखेड़िया, जयपुर
- 12. श्रीमती लीलावती वर्मा, जयपुर
- 13. श्री रिछपाल सुंकरिया, सुनाम, पंजाब
- 14 श्रीमती सोनिया रैगर, राजसमंद
- 15. श्री रविशंकर देवतवाल, दिल्ली
- 16. श्री ओमप्रकाश कांसोटिया, पावटा
- 17. श्री भागीरथमल कुलदीप, पावटा
- 18. श्री भगवान सहाय जाजोरिया, मुण्डावरा
- 19. श्री रामस्वरूप रैगर, केकड़ी
- 20. श्री डॉ रविन्द्र नारोलिया, चाकसू
- 21. श्री पृथ्वीराज जलुथरिया, दिल्ली